हवा से बाख़बर होना

इसे तुम अफसरी कह लो या मेरा घरबदर होना
कहाँ आसान होता है हवा से बाख़बर होना

जरा थम कर बयाबां में हक़ीकत को बयां करना
कि महसूसा है मैंने क़ातिलों का हमसफर होना

न धरती पर, न चेहरों पर, न आँखों में रहा पानी
बहुत बेचैन करता है रे! गांवों का शहर होना

जहां की निस्बतें हासिल मगर सुख-चैन के लाले
हजारों मर्ज देता है जियादा माल-अो-ज़र होना

हवाओं में घुटन, धरती के सीने में जहर क़ाबिज
कहाँ ले जाएगा हद से जियादा बेसबर होना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *