मुस्कराएं हम

शर्त को इस तरह निभाएं हम
बस किनारे पर डूब जाएं हम

काम की बातें ख़ातिर जमा रखें
जब मिलें उनसे मुस्कराएं हम

तुम्हारे तर्जुमे गुमराह करते हैं
एक ‘सही’ सच ढूंढ़ लाएं हम

काम में मसरूफ कितने भी रहें
एक ख़त तो डाल आएं हम

शम्बूक वध भी राम के हाथों ?
अब तो इनसे बाज आएं हम

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